रविवार, 14 अगस्त 2016

एक गो-भक्त से भेंट

*हरीशंकर परसाई  
एक शाम रेलवे स्टेशन पर एक स्वामी जी के दशर्न हो गए। साथ एक छोटे साइज का किशोर संन्यासी था। उसके हाथ में ट्रांजिस्टर था, और वह गुरु को रफी के गाने के सुनवा रहा था।मैंने पूछा-स्वामी जी, कहां जाना हो रहा है?स्वामी जी बोले दिल्ली जा रहे हैं, बच्चा!स्वामी जी बात से दिलचस्प लगे। मैं उनके पास बैठ गया। वे भी बेंच पर पालथी मारकर बैठ गए। सेवक को गाना बंद करने के लिए कहा।कहने लगे-बच्चा, धर्मयुद्ध छिड़ गया। गोरक्षा-आंदोलन तीव्र हो गया है। दिल्ली में संसद के सामने सत्याग्रह करेंगे। स्वामी जी से बातचीत का रास्ता खुल चुका था। जमकर बातें हुई, जिसमें तत्व मंथन हुआ। तत्व प्रेमियों के लाभार्थ वार्तालाप नीचे दे रहा हूं।स्वामी जी और बच्चा की बातचीतस्वामी जी, आप तो गाय का दूध ही पीते होंगे?नहीं बच्चा, हम भैंस के दूध का सेवन करते हैं। गाय कम दूध देती है, और वह पतला होता है। भैंस के दूध की बढ़िया गाढ़ी मलाई और रबड़ी बनती है।तो क्या सभी गोभक्त भैंस का दूध पीते हैं?हां, बच्चा, लगभग सभी।स्वामी जी, हर चुनाव के पहले गोभक्ति क्यों जोर पकड़ती है? इस मौसम में खास बात है क्या? बच्चा, जब चुनाव आता है, तब हमारे नेताओं को गोमाता सपने में दर्शन देती है। कहती है बेटा चुनाव आ रहा है। अब मेरी रक्षा का आंदोलन करो। देश की जनता अभी मूर्ख है। मेरी रक्षा का आंदोलन करके वोट ले लो। बच्चा, कुछ राजनीतिक दलों को गोमाता वोट दिलाती है, जैसे एक दल को बैल वोट दिलाते हैं। तो ये नेता एकदम आंदोलन छेड़ देते हैं, और हम साधुओं को उसमें शामिल कर लेते हैं। हमें भी राजनीति में मजा आता है। बच्चा, तुम हमसे ही पूछ रहे हो। तुम तो कुछ बताओ, तुम कहां जा रहे हो?स्वामी जी मैं ‘‘मनुष्य-रक्षा आंदोलन’ में जा रहा हूं। यह क्या होता है, बच्चा?स्वामी जी, जैसे गाय के बारे में मैं अज्ञानी हूं, वैसे ही मनुष्य के बारे में आप हैं। पर मनुष्य को कौन मार रहा है?इस देश के मनुष्य को सूखा मार रहा है, अकाल मार रहा है, महंगाई मार रही है। मनुष्य को मुनाफाखोर मार रहा है, कालाबाजारी मार रहा है। भ्रष्ट शासन-तंत्र मार रहा है। सरकार भी पुलिस की गोली से चाहे जहां मनुष्य को मार रही है। बिहार के लोग भूखे मर रहे हैं। बिहार? बिहार शहर कहां है बच्चा?बिहार एक प्रदेश है, राज्य है।अपने जम्बूद्वीप में है न?स्वामी जी, इसी देश में है, भारत में।यानी आर्यावर्त में?जी हां, ऐसा ही समझ लीजिए। स्वामी जी, आप भी मनुष्य-रक्षा आंदोलन में शामिल हो जाइए न!नहीं बच्चा, हम धर्मात्मा आदमी हैं। हमसे यह नहीं होगा। एक तो मनुष्य हमारी दृष्टि में बहुत तुच्छ है। वे लोग ही तो हैं, जो कहते हैं, मंदिरों और मठों में लगी जायदाद को सरकार ले ले। खैर, छोड़िए मनुष्य को। गोरक्षा के बारे में मेरी ज्ञान-वृद्धि कीजिए। एक बात बताइए, मान लीजिए आपके बरामदे में गेहूं सूख रहे हैं। तभी एक गोमाता आकर गेहूं खाने लगती है। आप क्या करेंगे?बच्चा? हम उसे डंडा मारकर भगा देंगे।पर स्वामी जी, वह गोमाता है न। पूज्य है। बेटे के गेहूं खाने आई है। आप हाथ जोड़कर क्यों नहीं कहते कि आ माता, मैं कृतार्थ हुआ। सब गेहूं खा जा।बच्चा, तुम हमें मूर्ख समझते हो?नहीं, मैं आपको गोभक्त समझता था।सो तो हम हैं, पर इतने मूर्ख भी नहीं हैं कि गाय को गेहूं खा जाने दें।पर स्वामी जी, यह कैसी पूजा है कि गाय हड्डी का ढांचा लिए हुए मुहल्ले में कागज और कपड़े खाती फिरती है और जगह-जगह पिटती है!बच्चा, यह कोई अचरज की बात नहीं है। हमारे यहां जिसकी पूजा की जाती है उसकी दुर्दशा कर डालते हैं। स्वामी जी, दूसरे देशों में लोग गाय की पूजा नहीं करते, पर उसे अच्छी तरह रखते हैं। बच्चा, दूसरे देशों की बात छोड़ो। हम उनसे बहुत ऊंचे हैं। देवता इसीलिए सिर्फ हमारे यहां अवतार लेते हैं। दूसरे देशों में गाय दूध के उपयोग के लिए होती है, हमारे यहां वह दंगा करने, आंदोलन करने के लिए होती है। हमारी गाय और गायों से भिन्न है।स्वामी जी, और सब समस्याएं छोड़कर आप लोग इसी एक काम में क्यों लग गए हैं?इसी से सब हो जाएगा, बच्चा! अगर गोरक्षा का कानून बन जाए, तो यह देश अपने-आप समृद्ध हो जाएगा। फिर बादल समय पर पानी बरसाएंगे, भूमि खूब अन्न देगी और कारखाने बिना चले भी उत्पादन करेंगे। धर्म का प्रताप तुम नहीं जानते। अभी जो देश की दुर्दशा है, वह गौ के अनादर का परिणाम है।स्वामी जी, जहां तक मैं जानता हूं, जनता के मन में इस समय गोरक्षा नहीं है, महंगाई और आर्थिक शोषण है। जनता आर्थिक न्याय के लिए लड़ रही है और इधर आप गोरक्षा-आंदोलन लेकर बैठ गए हैं। इसमें तुक क्या है?बच्चा, इसमें तुक है। देखो, जनता जब आर्थिक न्याय की मांग करती है, तब उसे किसी दूसरी चीज में उलझा देना चाहिए, नहीं तो वह खतरनाक हो जाती है। स्वामी जी, किसकी तरफ से आप जनता को इस तरह उलझाए रखते हैं? जनता की मांग का जिन पर असर पड़ेगा, उसकी तरफ से। यही धर्म है। स्वामी जी, एक बात और बताइए। कई राज्यों में गोरक्षा के लिए कानून है। बाकी में लागू हो जाएगा। तब यह आंदोलन भी समाप्त हो जाएगा। आगे आप किस बात पर आंदोलन करेंगे।अरे बच्चा, आंदोलन के लिए बहुत विषय हैं। सिंह दुर्गा का वाहन है। उसे सरकसवाले पिंजरे में बंद करके रखते हैं। उससे खेल कराते हैं। यह अधर्म है। सब सरकसवालों के खिलाफ आंदोलन करके देश के सारे सरकस बंद करवा देंगे। फिर, भगवान का एक अवतार मत्स्यावतार भी है। मछली भगवान का प्रतीक है। हम मछुआरों के खिलाफ आंदोलन छेड़ देंगे। सरकार का मत्स्य पालन विभाग बंद करवाएंगे।स्वामी जी, उल्लू लक्ष्मी का वाहन है। उसके लिए भी तो कुछ करना चाहिए। यह सब उसी के लिए तो कर रहे हैं, बच्चा! इस देश में उल्लू को कोई कष्ट नहीं है। वह मजे में है। (देश में गोरक्षा पर समर्थन-विरोध के वातावरण को देखते हुए प्रख्यात व्यंग्यकार हरिशंकर परसाई जी के चर्चित व्यंग्य की प्रासंगिकता असंदिग्ध है। पाठकों के लिएइसे पुनप्र्रकाशित किया जा रहा है)


इलेस्ट्रेशन : रवींद्र दास
     

बुधवार, 1 अगस्त 2012

शिक्षकों की कमी


शिक्षकों की कमी से जूझती सरकार देख रही सपने

Aug 01, 08:38 pm
नई दिल्ली [राजकेश्वर सिंह]। भारत को 'नॉलेज इकोनॉमी' में विश्व का हब बनने का सपना सरकार भले ही देख रही हो, लेकिन सच्चाई यह है कि देश का शैक्षिक ढांचा बुरी तरह चरमरा रहा है। जिस देश में स्कूली शिक्षकों के साढ़े बारह लाख और केंद्रीय विश्वविद्यालयों में छह हजार से अधिक पद खाली हों, वहां शैक्षिक बदहाली का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।
शिक्षकों की कमी को पूरा करने और योग्य शिक्षकों के बिना क्वालिटी एजूकेशन [गुणवत्तापूर्ण शिक्षा] के मोर्चे पर राज्य सरकारें तो गुनहगार हैं ही, लेकिन केंद्र खुद भी कठघरे में है।
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान [आइआइटी],भारतीय प्रबंध संस्थान [आइआइएम], भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं शोध संस्थान और भारतीय प्रबंध संस्थानों [आइआइएम] जैसे संस्थान भी इस बदहाली से अछूते नहीं हैं। अकेले आइआइटी फैकल्टी के कुल 5092 पदों में 1611 खाली हैं। तो आइआइएम में स्वीकृत 638 पदों में 111 खाली चल रहे हैं। सरकार केंद्रीय विश्वविद्यालयों को राज्य विवि की तुलना में बेहतर मानती है। जबकि, वहां स्थिति और बदतर है, जहां 6542 पदों पर शिक्षक ही नहीं हैं। इनमें शिक्षकों के 16,602 स्वीकृत पद हैं।
जहां तक स्कूली शिक्षकों की कमी का सवाल है तो उसमें बिहार, उत्तर प्रदेश, प. बंगाल, झारखंड समेत लगभग आधा दर्जन राज्यों ने देश की तस्वीर बिगाड़ रखी है। देश में कुल साढ़े बारह लाख स्कूली शिक्षकों की जो कमी है, उनमें आधी छह लाख 26 हजार इन्हीं राज्यों में है। 20 करोड़ से अधिक आबादी वाले देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में तीन लाख 12 हजार शिक्षकों के पद खाली हैं। बिहार में नीतीश कुमार सरकार की वाहवाही हो रही है, जबकि वहां दो लाख 62 हजार स्कूली शिक्षकों के पद रिक्त पड़े हैं। प. बंगाल में स्कूली शिक्षकों के एक लाख अस्सी हजार पद खाली हैं। भाजपा शासित मध्य प्रदेश में 89 हजार शिक्षकों के पद भरे जाने का इंतजार कर रहे हैं। इसी तरह दिल्ली में भी दस हजार शिक्षकों के पद रिक्त हैं।
केंद्रीय संस्थानों में फैकल्टी के खाली पदों की स्थिति
केंद्रीय विश्वविद्यालय--कुल पद 16602 खाली--6542
आइआइटी---कुल पद 5092---खाली---1611
ट्रिपल आइटी--कुल पद 224---खाली ---104
आइआइएम---कुल पद--638---खाली 111
एनआइटी---कुल पद 4291--खाली--1487
आइआइएससीआर---कुल पद 518--खाली---131

गुरुवार, 19 जुलाई 2012

रिटायरमेंट की उम्र 65 करने का भी प्रावधान शामिल है।


शिक्षकों के लिए एरियर जारी

नई दिल्ली
Story Update : Friday, July 20, 2012    1:59 AM
Arrears to the teachers
केंद्र सरकार ने राज्य सरकारों के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में छठा वेतन आयोग लागू होने के बाद शिक्षकों के लिए एरियर जारी करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। केंद्र के इस फैसले से करीब चार लाख शिक्षक लाभान्वित होंगे।

केंद्रीय कैबिनेट ने रिटायरमेंट की उम्र के मामले को राज्य सरकारों को मदद जारी करने के मामले से अलग करने पर मुहर लगा दी है। इसी के चलते केंद्र से राज्यों को एरियर जारी करने में बाधा आ रही थी। राज्यों ने रिटायर होने की उम्र के मामले को एरियर जारी किए जाने से जोड़ने का विरोध किया था। उनका कहना था कि इससे राज्य सरकारों पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।

सूत्रों के मुताबिक करीब 8 हजार करोड़ रुपये का एरियर राज्यों को तीन चार किस्तों जारी किया जाएगा। छठे वेतन आयोग के तहत शिक्षकों के लिए रिटायरमेंट की उम्र 65 करने का भी प्रावधान शामिल है।